Wednesday, May 16, 2012

अमर हो गया 18 वीं सदी के एक राजा का प्रेम!

राजस्थान, जो अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में शुमार है,जहां एक ओर दूर तक फैला हुआ थार का रेगिस्तान है तो दूसरी ओर राजपूत राजा-महाराजाओं के गौरवपूर्ण इतिहास की गाथा गाते हुए ऊंचे-ऊंचे महल हैं|जहां की कला संस्कृति सम्पूर्ण विश्व में अपनी एक अलग छाप लिए हुए है| 

पूरे विश्व में अपना परचम फहराने वाली इन्ही कलाओं में से एक कला हैं यहां की लघु चित्रकारी|जिसकी शुरुआत मुगलों के द्वारा की गई थी| इस कला को फराज (पार्शिया) से लाया गया था| हुमायु ने फ़राज़ से चित्रकारों को बुलाया था, बाद में अकबर ने इसे बढ़ावा देने के लिए एक शिल्प कला का निर्माण करवाया था| फ़राज़ के कलाकारों ने इस भारतीय कलाकारों को इस कला का प्रशिक्षण दिया, बाद में इस खास शैली में तैयार किये गए चित्र राजस्थानी चित्र या राजपूत चित्र कहलाए|
बनी-ठनी 
अठारहवीं सदी में राजस्थान के किशनगढ़ प्रान्त में एक नई कला ने जन्म लिया जिसे आज भी बनी ठनी के नाम से जाना जाता है|इस कला का जन्म महाराजा सावंत सिंह के शासन काल में हुआ था| कहा जाता है कि महाराजा सावंत सिंह को बनी ठनी नामक एक दासी से प्रेम हो गया था, तब उन्होंने उस समय के कलाकारों को आदेश दिया कि वे कृष्ण-राधा के प्रेम चित्रों के रूप में उनकी और उनकी प्रेमिका की तस्वीरें बनाएं| बाद में यह चित्रकारी इतनी प्रसिद्ध हो गई कि इसे भारत की मोनालिसा के नाम से जाना जाने लगा|आज भी देश-विदेश में बनी ठनी का एक अलग ही मुकाम है|













Source:bhaskar.com

2 comments:

kunwarji's said...

SUNDAR JANKARI....

Kunwar ji,

rakesh rana said...

Very good information,we all heard but dont know the fact

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